सूर के पदों का संक्षिप्त परिचय। भ्रमरगीत। उद्धव पर गोपियों का व्यंग।

श्री कृष्ण द्वारा उद्धव को अपना संदेश देकर जब श्री कृष्ण मथुरा भेजते हैं। वहां गोपियां जो कृष्ण की विरह वेदना में जलती है, उन्हें उद्धव का ब्रह्म ज्ञान पसंद नहीं आता और वह भंवरे को आधार मानते हुए उसे प्रेम की शिक्षा देती है। इस गीत को सूरदास जी ने बड़े ही बारीकी से … Read more

समाजशास्त्र। Samajshastra का अर्थ एवं परिभाषा। sociology

जो विज्ञान समाज के लिए हो उन्हें हम साधारण शब्दों में समाजशास्त्र कहते हैं। समाजशास्त्र के अंतर्गत समाज के विभिन्न पहलुओं पर चिंतन किया जाता है। प्रस्तुत लेख में समाजशास्त्र का विस्तृत रूप से अध्ययन करेंगे तथा विभिन्न पहलुओं को भी बारीकी से जानेंगे। समाजशास्त्र का अर्थ एवं परिभाषा Samajshastra समाजशास्त्र एक नया अनुशासन है … Read more

Education and society notes in hindi

किसी भी समाज को आदर्श बनाने के लिए शिक्षा की आवश्यकता होती है। शिक्षा के द्वारा ही एक सभ्य समाज का निर्माण संभव है इसके अभाव में व्यक्ति पशु के समान जीवन व्यतीत करने पर विवश होता है। वह अच्छे बुरे में फर्क नहीं कर पाता उन्नति तथा अवनति में फर्क नहीं कर पाता। आज … Read more

प्रगतिशील काव्य। प्रयोगवाद। prgatishil, prayogwaad kavya kya hai

प्रगतिशील हिंदी काव्य का विकास अन्य काव्य से अधिक हुआ है, इसने पुरानी परिपाटी और क्लासिक सांस्कृतिक बंधनों मुक्ति पाने का सफल प्रयास किया। आज हम प्रगतिशील तथा प्रयोगवाद पर विस्तृत रूप से अध्ययन करेंगे, उसकी भाषा शैली विचार समस्त बिंदु पर गहनता से समझने का प्रयत्न करेंगे समझने का प्रयत्न करेंगे। प्रगतिशील काव्य। प्रयोगवाद … Read more

सुमित्रा नंदन पंत। प्रकृति के सुकुमार कवि।छायावाद।

सुमित्रा नंदन पंत। प्रकृति के सुकुमार कवि।छायावाद।    सुमित्रा नंदन पंत के कोमल चितेरे का वर्णन    प्रस्तावना   कविवर सुमित्रा नंदन पंत छायावादी काव्यधारा के सर्वथा अनूठे और विशिष्ट कवि हैं।सुमित्रा नंदन पंत जी को छायावाद का चौथा स्तंभ माना जाता है। दूसरे शब्दों में कविवर सुमित्रा नंदन पंत का छायावादी काव्यधारा को संवारने बनाने … Read more

हिंदी रंगमंच और उसका विकास hindi rangmanch ka vikas

रंगमंच का विकास भारतीय परिपेक्ष में बड़ा ही रोचक है, इसका जन जागरण तथा राष्ट्रीय जागरण में विशेष प्रयोग किया गया। जिस संदेश को हम शब्दों के माध्यम से जनसामान्य तक नहीं पहुंचा सकते उन्हें हम दृश्य माध्यम से सरलता पूर्वक पहुंचा पाते हैं। यही दृश्य काव्य की प्रमुख विशेषता है आज के लेख में … Read more

काव्य का स्वरूप एवं भेद। महाकाव्य। खंडकाव्य , मुक्तक काव्य

हिंदी साहित्य विश्व की सर्वश्रेष्ठ साहित्यों में से एक है, जिसमें सभी रसों का आस्वादन किया जाता है। इस साहित्य को श्रेष्ठ बनाने में निश्चित रूप से साहित्यिक व्याकरण का महत्व होता है। इस लेख में आप उन समस्त बिंदुओं तथा काव्य से संबंधित विचारों का विस्तृत रूप से अध्ययन करेंगे। यह लेख हिंदी साहित्य … Read more

Kavya ka Swrup or Bhed काव्य का स्वरूप एवं भेद

हिंदी काव्य का स्वरूप बेहद ही वृहत्तर है, इसके अंतर्गत अनेकों ऐसे खंड या विधा है जिसका एक अलग ही संसार है। आज इस लेख में हम काव्य के विभिन्न स्वरूप जैसे महाकाव्य खंडकाव्य मुक्तक काव्य आदि का विस्तृत रूप से अध्ययन करेंगे। काव्य का स्वरूप एवं भेद भाषा के माध्यम से जीवन की मार्मिक … Read more

हिंदी नाटक का विकास। Bhartendu । भारतेन्दु। प्रसाद , द्विवेदी युगीन नाटक | jayshankar prsaad

भारत में हिंदी नाटक का विकास आधुनिक युग में हुआ भारतीय नाट्यकारों ने नाटक के माध्यम से जन सामान्य को जागरूकता के लिए प्रयोग किया। यह दृश्य काव्य होने के कारण जन सामान्य किस विधा से अधिक जुड़ पाए। आधुनिक नाट्यकारों ने हिंदी नाटक को एक नया आयाम दिया। आज के लेख में हम नाटक … Read more

शिक्षा का समाज पर प्रभाव ( समाज और शिक्षा ) Influence of education on society

समाज पर शिक्षा का प्रभाव पड़ता है जहां शिक्षा होती है। वह समाज शिक्षित तथा सभ्यता की ओर अग्रसर होता है। वह सृजन करता है शिक्षा के अभाव में व्यक्ति अपने शक्तियों का दुरुपयोग करता है, जिससे समाज का अहित होता है। आज के लेख में हम शिक्षा का समाज पर प्रभाव विषय को विस्तार … Read more