राम काव्य परंपरा। राम काव्य की प्रवृत्तियां। भक्ति काल रीतिकाल रीतिकाव्य

वैसे ‘ राम ‘ शब्द का प्रयोग वेदों में कुछ स्थलों पर अवश्य हुआ है , परंतु यह राम दशरथ पुत्र राम है। दक्षिण भारत के रामानुजाचार्य ने श्री वैष्णव संप्रदाय की स्थापना की थी। जिसमें नारायण के रूप में विष्णु की उपासना का विधान था। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने स्वामी रामानंद को राम कथा … Read more

आदिकाल की मुख्य प्रवृतियां। आदिकाल का साहित्य स्वरूप Aadikaal notes

आदिकाल का समय 1050 से 1375 तक का माना जाता है। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने वीरगाथा काल कहा। आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने आदिकाल से नामकरण किया। इस काल में अधिकतर रासो ग्रंथ लिखे गए जैसे – विजयपाल रासो  ,  हम्मीर रासो  ,  खुमान रासो  ,  बीसलदेव रासो  ,  पृथ्वीराज रासो  ,  परमाल रासो आदि … Read more

आदिकाल की परिस्थितियां | राजनीतिक धार्मिक सामाजिक सांस्कृतिक साहित्यिक परिस्थितियां। aadikaal

आदिकाल की परिस्थितियां   आदिकाल की परिस्थितियां – साहित्य मानव समाज की भावात्मक स्थिति एवं गतिशील चेतना की सार्थक अभिव्यक्ति है। साहित्य मानव के आदर्श समाज का निर्माण करने में अग्रणी भूमिका निभाती है। साहित्य ही मानव के अगली पीढ़ी तक उनके आदर्शों को पहुंचती है। राजनीतिक धार्मिक सामाजिक सांस्कृतिक साहित्यिक परिस्थितियां – आदिकाल की … Read more

आदिकाल परिचय। साहित्य की आधार सामग्री। काल विभाजन। aadikaal notes

आदिकाल परिचय – इतिहास शब्द इति + ह + आस से निर्मित है  , जिसका अर्थ है ऐसा हुआ था , या ऐसा हुआ होगा। इस प्रकार अतीत की घटनाओं के कालक्रम में संयोजित इतिवृत्त को इतिहास माना जाता है। हिंदी साहित्य का इतिहास अनेक दृष्टियों एवं सामग्री स्रोतों के आधार पर लिखा गया , … Read more

उपन्यास के उदय के कारण। उपन्यास का अर्थ संपूर्ण जानकारी

उपन्यास के उदय के कारण -> उपन्यास यूरोप की देन है , जो बांग्ला साहित्य में अनुवाद के माध्यम से आया। उपन्यास शब्द बांग्ला साहित्य की देन है। मुद्रण व गद्य के विकास ने  ही  उपन्यास को जन्म दिया। उपन्यास को आधुनिक जीवन का ‘ महाकाव्य ‘ कहा जाता है। आरंभ में उपन्यास मनोरंजन , … Read more

काल विभाजन का आधार।काल विभाजन अथवा नामकरण। आदिकाल रीतिकाल भक्तिकाल

काल विभाजन का आधार     सर्वप्रथम डॉक्टर ‘ जॉर्ज ग्रियर्सन ‘ ने काल का विभाजन किया उन्होंने भक्ति काल को ‘ स्वर्ण युग ‘ कहा किंतु किसी ने ध्यान नहीं दिया। मिश्र बंधुओं ने मिश्रबंधु विनोद में हिंदी साहित्य को नौ खंडों में विभाजन किया किंतु इसके साहित्य में प्रमाणिकता का अभाव था। आचार्य रामचंद्र शुक्ल … Read more

भाषा की प्रकृति तथा परिभाषा। भाषा के प्रकार्य उदहारण सहित। भाषा की प्रकृति का सरल नोट्स

भाषा की प्रकृति तथा परिभाषा   भाषा की प्रकृति तथा परिभाषा प्रश्न भाषा से क्या अभिप्राय है ? भाषा की परिभाषा देते हुए उसकी प्रकृति स्पष्ट कीजिए। उत्तर  – मुख्य तत्त्व निम्मनलिखित है – भाषा शब्द संस्कृत की ‘ भाषा ‘ धातु से निर्मित है। जिसका अर्थ है ‘ बोलना ‘ | ध्वनियाँ  किसी ‘ अर्थ ‘ … Read more

भाषाविज्ञान के अध्ययन के प्रकार एवं पद्धतियां। Bhasha vigyan

भाषाविज्ञान के अध्ययन के चार पद्धतियां मुख्य रूप से प्रचलित है। इन चार पद्धतियों के आधार पर भाषा विज्ञान के सभी चार प्रकार हैं – 1. वर्णनात्मक  –  भाषाविज्ञान के अध्ययन भाषाविज्ञान वर्णनात्मक भाषा विज्ञान के अंतर्गत किसी विशिष्ट काल की किसी एक विशेष भाषा का अध्ययन किया जाता है। भाषा विज्ञान के इस प्रकार में … Read more

भाषा स्वरूप तथा प्रकार। भाषाविज्ञान की परिभाषा।

भाषा स्वरूप तथा प्रकार की संपूर्ण जानकारी. भाषा जिस विषय में भाषा का अध्ययन किया जाता है , उसे भाषा विज्ञान कहा जाता है। किसी विषय का क्रमबद्ध अथवा विशिष्ट ज्ञान – विज्ञान कहलाता है। विशिष्ट ज्ञान वह है , जिसमें विषय का सर्वांगीण , निरीक्षण एवं परीक्षण करके तत्संबंधी सार्वभौम एवं सर्वकालिक नियमों अथवा … Read more

स्वामी विवेकानन्द के शिक्षा दर्शन के आधारभूत सिद्धान्त | Swami vivekanand teachings

स्वामी विवेकानन्द के शिक्षा दर्शन के आधारभूत सिद्धान्त निम्नलिखित हैं –   नमस्कार दोस्तों आज आपको हम बताने जा रहे हैं स्वामी विवेकानन्द के शिक्षा दर्शन के आधारभूत सिद्धान्त | आशा है आपको पसंद आएगा | १. स्वामी विवेकानन्द जी का मानना है कि शिक्षा ऐसी हो जिससे बालक का शारीरिक, मानसिक एवं आत्मिक विकास हो सके। २. स्वामी विवेकानन्द जी के अनुसार शिक्षा ऐसी हो … Read more